Sarva-pratyaya-hetave शब्द की व्याख्या श्रील विश्वनाथ चक्रवर्ती ठाकुर करते हैं, जो कहते हैं कि किसी फल को देखकर उसके कारण का पता लग जाता है | उदाहरण के लिए मिट्टी का घड़ा कुम्हार के कार्य का फल है इसलिए घड़े को देखकर कुम्हार के होने का अनुमान लगा सकते हैं | इसी प्रकार, यह भौतिक जगत आध्यात्मिक जगत जैसा दिखाई देता है, और कोई भी बुद्धिमान व्यक्ति अनुमान लगा सकता है कि यह कैसे कार्य करता है | जैसा कि भगवदगीता में कहा गया है, mayadhyaksena prakritih suyate sa-caracaram | भौतिक जगत के कार्य बताते हैं कि उसके पीछे भगवान का निर्देशन है |
