विभिन्न प्रकार के वायुमंडल से गुजरने वाली वायु की तरह, भगवान विष्णु कभी मनुष्य के रूप में और कभी निम्न पशु के रूप में प्रकट होते हैं, लेकिन प्रकृति से हमेशा परे रहते हैं। प्रकृति के गुणों से परे रहने के कारण, वे उच्च और निम्न रूपों से अप्रभावित रहते हैं।
Although the Lord sometimes appears as a human being and sometimes as a lower animal, He is always transcendental to nature, like the air passing through various kinds of atmosphere. Being transcendental to the modes of nature, He is not affected by higher and lower forms.
तात्पर्य
परमेश्वर भगवान भौतिक प्रकृति के स्वामी हैं (मायाध्यक्षेण प्रकृतिः सूयते सचराचरम)। इसलिए, प्रकृति के नियमों का सर्वोच्च नियंत्रक होने के कारण, भगवान उनके प्रभाव में नहीं हो सकते। इस संबंध में एक उदाहरण दिया गया है कि यद्यपि हवा कई स्थानों से बहती है, लेकिन इन स्थानों के गुण हवा को प्रभावित नहीं करते। यद्यपि हवा कभी-कभी एक गंदी जगह की गंध ले जाती है, लेकिन हवा का ऐसी जगह से कोई लेना-देना नहीं है। इसी तरह, भगवान सर्वशक्तिमान और सर्व-शुभ होने के कारण, भौतिक गुणों से कभी भी प्रभावित नहीं होते हैं जैसे कि एक सामान्य जीव होता है। पुरुषः प्रकृति-स्थो हि भुङ्क्ते प्रकृतिजान् गुणान। जब जीव भौतिक प्रकृति में होता है, तो वह उसके गुणों से प्रभावित होता है। हालाँकि, भगवान सर्वशक्तिमान प्रभावित नहीं होते हैं। अपमानजनक रूप से, जो यह नहीं जानता वह भगवान को एक सामान्य जीव मानता है (अवजानन्ति माम मूढाः)। परम भावम अजानन्ताः: ऐसा निष्कर्ष मूर्खों द्वारा निकाला जाता है क्योंकि वे भगवान के अलौकिक गुणों से अनजान होते हैं।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥