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bhagavat 8.24.41: तदुपरांत विशाल बादलों ने बिना रुके पानी बरसाया जिससे समुद्र का जलस्तर बहुत बढ़ गया। इस बढ़े हुए समुद्र ने स्थल पर बहना शुरू कर दिया और पूरी दुनिया में पानी भर गया।   |   bhagavat अध्याय 8.24: भगवान् का मत्स्यावतार   ।   bhagavat स्कन्ध 8: ब्रह्माण्डीय सृष्टि का निवर्तन   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 8: ब्रह्माण्डीय सृष्टि का निवर्तन  »  अध्याय 24: भगवान् का मत्स्यावतार  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  8.24.41 
तत: समुद्र उद्वेल: सर्वत: प्लावयन् महीम् ।
वर्धमानो महामेघैर्वर्षद्भ‍ि: समद‍ृश्यत ॥ ४१ ॥
 
 
अनुवाद
तदुपरांत विशाल बादलों ने बिना रुके पानी बरसाया जिससे समुद्र का जलस्तर बहुत बढ़ गया। इस बढ़े हुए समुद्र ने स्थल पर बहना शुरू कर दिया और पूरी दुनिया में पानी भर गया।
 
Thereafter, huge clouds showered water and made the sea water rise even more. Due to this, the sea started flowing over the land and it started submerging the entire world.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)