श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 8: ब्रह्माण्डीय सृष्टि का निवर्तन  »  अध्याय 24: भगवान् का मत्स्यावतार  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  8.24.37 
अहं त्वामृषिभि: सार्धं सहनावमुदन्वति ।
विकर्षन् विचरिष्यामि यावद् ब्राह्मी निशा प्रभो ॥ ३७ ॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! इस नाव में तुम्हें और समस्त ऋषियों को बिठाकर, प्रलय के जल में मैं तब तक यात्रा करूँगा जब तक कि ब्रह्मा जी की शयन-रात्रि पूरी नहीं हो जाती।
 
O King, pulling you along with all the sages seated in the boat, I will roam in the water of deluge until the Brahma's sleeping night is over.
तात्पर्य
यह खास तबाही वास्‍तव में भगवान ब्रह्मा की रात के दौरान नहीं हुई बल्कि उनके दिन के दौरान हुई, क्‍योंकि वह चाक्षुष मनु के समय में हुआ था। ब्रह्मा की रात तब होती है जब ब्रह्मा सोने जाते हैं, लेकिन दिन के समय चौदह मनु होते हैं, जिनमें से एक चाक्षुष मनु हैं। इसलिए, श्रील विश्‍वनाथ चक्रवर्ती ठाकुर ने टिप्‍पणी की है कि यद्यपि भगवान ब्रह्‍मा के लिए वो दिन का समय था, लेकिन भगवान की सर्वोच्‍च इच्‍छा से ब्रह्‍मा थोड़े समय के लिए सो गए थे। इस थोड़े समय को भगवान ब्रह्‍मा की रात माना जाता है। श्रील रूप गोस्‍वामी ने अपने लघु भागवतामृत में इस पर विस्‍तृत चर्चा की है। नि‍म्‍नलिखित उनकी विश्लेषण का सारांश है। क्‍योंकि अगस्‍त्‍य मुनि ने स्‍वायम्‍भुव मनु को शाप दिया था, स्‍वायम्‍भुव मनु के समय में एक तबाही हुई। इस तबाही का उल्‍लेख मत्‍स्‍य पुराण में है। चाक्षुष मनु के समय में, भगवान की सर्वोच्‍च इच्‍छा के अनुसार, अचानक एक और प्रलय या तबाही हुई। इसका उल्‍लेख मार्कण्‍डेय ऋषि ने वि‍ष्‍णु-धर्मोत्‍तर में किया है। मनु के समय के अंत में जरूरी नहीं कि तबाही होती हो, लेकिन चाक्षुष-मन्‍वंतर के अंत में, भगवान वि‍ष्‍णु अपनी भ्रामक शक्‍ति से, सत्‍यव्रत को तबाही के प्रभाव दिखाना चाहते थे। श्रील श्रीधर स्‍वामी भी इस राय से सहमत हैं। लघु भागवतामृत कहता है:

मध्‍ये मन्‍वन्‍तरास्‍यैव

मुनहेः शापान्‍ मनुम्‍ प्रति

प्रलयो सौ बभूвети

पुराणे क्वचित्‍ इर्यते

अयं आकस्‍मिको जाता

चाक्षुषस्‍य अंतरे मनो

प्रलयः पदमनाभस्‍य

लीलायेति च कुत्रचिल

सर्व-मन्‍वन्‍तरास्‍यान्‍ते

प्रलयो निश्चितम्‍ भवेत्‍

विष्‍णु-धर्मोत्‍तरे त्व एतत्‍

मार्कण्‍डेयेण भाषितम्‍

मनोर आन्‍ते लयो नास्‍ति

मन्‍वे दशि मायया

विष्‍णुनेति ब्रुवाणैस्तु

स्‍वामिभि नैषा मन्‍यते

 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)