Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 8.24.34-35: हे राजन्! उसके पश्चात् तुम सब प्रकार की औषधियाँ एवं बीजों का संग्रह करके उस विशाल नाव में चढ़ाओगे। फिर तुम उस नाव में सप्त ऋषियों और समस्त प्रकार के जीवों से घिरे रहकर चढ़ोगे और बिना किसी खिन्नता के तुम अपने संगियों सहित बाढ़ के समुद्र में सहजतापूर्वक विचरण करोगे। उस समय ऋषियों का तेज ही एकमात्र प्रकाश होगा। | bhagavat अध्याय 8.24: भगवान् का मत्स्यावतार । bhagavat स्कन्ध 8: ब्रह्माण्डीय सृष्टि का निवर्तन । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
हे राजन्! उसके पश्चात् तुम सब प्रकार की औषधियाँ एवं बीजों का संग्रह करके उस विशाल नाव में चढ़ाओगे। फिर तुम उस नाव में सप्त ऋषियों और समस्त प्रकार के जीवों से घिरे रहकर चढ़ोगे और बिना किसी खिन्नता के तुम अपने संगियों सहित बाढ़ के समुद्र में सहजतापूर्वक विचरण करोगे। उस समय ऋषियों का तेज ही एकमात्र प्रकाश होगा।
O King! Then you will collect all kinds of medicinal herbs and seeds and load them in that huge boat. Then, along with the Saptarishis and surrounded by all kinds of creatures, you will board that boat and without any discomfort, you will roam comfortably in the sea of floods along with your companions. At that time, the brilliance of the sages will be the only light.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥