श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 8: ब्रह्माण्डीय सृष्टि का निवर्तन  »  अध्याय 24: भगवान् का मत्स्यावतार  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  8.24.20 
न म एतदलं राजन् सुखं वस्तुमुदञ्चनम् ।
पृथु देहि पदं मह्यं यत् त्वाहं शरणं गता ॥ २० ॥
 
 
अनुवाद
तब मछली बोली: हे राजा! यह जलकुंड मेरे सुखमय निवास के योग्य नहीं है। कृपा करके मुझे और अधिक विस्तृत जलकुंड प्रदान करो, क्योंकि मैं तुम्हारी शरण में आ गई हूँ।
 
Then the fish said: O King! This reservoir is not suitable for my comfortable stay. Please provide a more spacious reservoir as I have come to your refuge.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)