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bhagavat 8.24.16: राजा की दयालुता के कारण, मछली के दयनीय शब्दों से प्रभावित होकर, उसने मछली को एक पानी के बर्तन में रखा और उसे अपने घर ले आया।   |   bhagavat अध्याय 8.24: भगवान् का मत्स्यावतार   ।   bhagavat स्कन्ध 8: ब्रह्माण्डीय सृष्टि का निवर्तन   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 8: ब्रह्माण्डीय सृष्टि का निवर्तन  »  अध्याय 24: भगवान् का मत्स्यावतार  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  8.24.16 
तस्या दीनतरं वाक्यमाश्रुत्य स महीपति: ।
कलशाप्सु निधायैनां दयालुर्निन्य आश्रमम् ॥ १६ ॥
 
 
अनुवाद
राजा की दयालुता के कारण, मछली के दयनीय शब्दों से प्रभावित होकर, उसने मछली को एक पानी के बर्तन में रखा और उसे अपने घर ले आया।
 
Moved by the compassionate words of the fish, the kind king placed the fish in a water vessel and brought it to his home.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)