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bhagavat 8.23.9: भगवान ने कहा: हे मेरे प्रिय पुत्र प्रह्लाद! तुम्हारा भला हो। फिलहाल, तुम सुतल नामक स्थान पर जाओ और वहाँ अपने पौत्र और अन्य रिश्तेदारों और दोस्तों के साथ ख़ुशियाँ मनाओ।   |   bhagavat अध्याय 8.23: देवताओं को स्वर्गलोक की पुनर्प्राप्ति   ।   bhagavat स्कन्ध 8: ब्रह्माण्डीय सृष्टि का निवर्तन   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 8: ब्रह्माण्डीय सृष्टि का निवर्तन  »  अध्याय 23: देवताओं को स्वर्गलोक की पुनर्प्राप्ति  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  8.23.9 
श्रीभगवानुवाच
वत्स प्रह्लाद भद्रं ते प्रयाहि सुतलालयम् ।
मोदमान: स्वपौत्रेण ज्ञातीनां सुखमावह ॥ ९ ॥
 
 
अनुवाद
भगवान ने कहा: हे मेरे प्रिय पुत्र प्रह्लाद! तुम्हारा भला हो। फिलहाल, तुम सुतल नामक स्थान पर जाओ और वहाँ अपने पौत्र और अन्य रिश्तेदारों और दोस्तों के साथ ख़ुशियाँ मनाओ।
 
God said: O my dear son Prahlad! May you be blessed. Now go to a place called Sutala and enjoy life there with your grandson and other family members and friends.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)