Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 8.23.3: शुकदेव गोस्वामी जी ने आगे कहा: इस प्रकार कहने के बाद, बलि महाराजा ने सबसे पहले भगवान हरि को और फिर ब्रह्मा जी और भगवान शिव को प्रणाम किया। इस प्रकार वह नाग-पाश (वरुण के पाश) से मुक्त हो गया और पूरी तरह से संतुष्ट होकर सुतललोक में प्रवेश किया। | bhagavat अध्याय 8.23: देवताओं को स्वर्गलोक की पुनर्प्राप्ति । bhagavat स्कन्ध 8: ब्रह्माण्डीय सृष्टि का निवर्तन । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
शुकदेव गोस्वामी जी ने आगे कहा: इस प्रकार कहने के बाद, बलि महाराजा ने सबसे पहले भगवान हरि को और फिर ब्रह्मा जी और भगवान शिव को प्रणाम किया। इस प्रकार वह नाग-पाश (वरुण के पाश) से मुक्त हो गया और पूरी तरह से संतुष्ट होकर सुतललोक में प्रवेश किया।
Sukadeva Goswami continued: After saying this, Bali Maharaja first bowed down to Lord Hari and then to Brahma and Shiva. In this way, he was freed from the snake-lock (Varunalock) and entered the Sutaloka realm, completely satisfied.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥