त्वं नूनमसुराणां न: परोक्ष: परमो गुरु: ।
यो नोऽनेकमदान्धानां विभ्रंशं चक्षुरादिशत् ॥ ५ ॥
अनुवाद
चूँकि आप हम असुरों के अप्रत्यक्ष रूप से परम सद्इच्छुक हैं, इसलिए हमारी दुश्मनी करने के बावजूद भी आप हमारे सर्वोत्कृष्ट कल्याण के लिए कर्म करते हैं। क्योंकि हम जैसे असुर हमेशा मिथ्या प्रतिष्ठा के पद को पाने की महत्त्वाकांक्षा करते हैं, इस कारण आप हमें दण्डित करके हमारी आँखें खोलते हैं जिससे हम सन्मार्ग देख सकें।
Since You are the greatest well-wisher of us demons indirectly, You act for our highest welfare even while disguising Yourself as our enemy. Since demons like us always aspire to attain positions of false prestige, You open our eyes of wisdom by punishing us so that we can see the right path.
तात्पर्य
बाली महाराज ने परमेश्वर को दैत्यों का देवताओं से बढ़कर मित्र माना। भौतिक जगत में, व्यक्ति भौतिक संपत्ति जितना अधिक प्राप्त करता है, आध्यात्मिक जीवन से उतना ही अंधा हो जाता है। देवता भौतिक संपत्ति के लिए प्रभु के भक्त हैं, किन्तु यद्यपि दैत्यों के पास स्पष्ट रूप से अपनी तरफ परमेश्वर नहीं हैं, फिर भी वह हमेशा उनके कल्याणकारी के रूप में काम करते हैं, जिससे वे उन्हें मिथ्या प्रतिष्ठा के पद से वंचित कर देते हैं। मिथ्या प्रतिष्ठा से व्यक्ति गुमराह हो जाता है, इसलिए सर्वोच्च प्रभु उन्हें विशेष अनुग्रह के रूप में मिथ्या प्रतिष्ठा की स्थिति से वंचित कर देते हैं।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥