वैदिक साहित्य में हम कई अलग-अलग ग्रहों का वर्णन पाते हैं जहाँ बहुत सारे महल हैं, जो कि इस पृथ्वी ग्रह पर हमारे अनुभव से सैकड़ों-हजारों गुना बेहतर हैं। जब हम महलों की बात करते हैं, तो स्वाभाविक रूप से इसमें महान शहरों और कस्बों का विचार शामिल होता है। दुर्भाग्य से, जब आधुनिक वैज्ञानिक अन्य ग्रहों का पता लगाने की कोशिश करते हैं तो उन्हें चट्टानें और रेत के अलावा कुछ भी दिखाई नहीं देता। बेशक, वे अपने तुच्छ भ्रमण पर जा सकते हैं, लेकिन वैदिक साहित्य के छात्र उन्हें कभी भी विश्वास नहीं करेंगे या उन्हें अन्य ग्रहों की खोज करने का कोई श्रेय नहीं देंगे।
