श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 8: ब्रह्माण्डीय सृष्टि का निवर्तन  »  अध्याय 22: बलि महाराज द्वारा आत्मसमर्पण  »  श्लोक 29-30
 
 
श्लोक  8.22.29-30 
क्षीणरिक्थश्‍च्युत: स्थानात् क्षिप्तो बद्धश्च शत्रुभि: ।
ज्ञातिभिश्च परित्यक्तो यातनामनुयापित: ॥ २९ ॥
गुरुणा भर्त्सित: शप्तो जहौ सत्यं न सुव्रत: ।
छलैरुक्तो मया धर्मो नायं त्यजति सत्यवाक् ॥ ३० ॥
 
 
अनुवाद
धन से वंचित, अपने मूल स्थान से गिरकर, अपने शत्रुओं के हारने और गिरफ्तार होने के बावजूद, अपने परिजनों और दोस्तों द्वारा फटकारे और छोड़े जाने के बावजूद, बंधे होने के दर्द से पीड़ित और अपने आध्यात्मिक गुरु बली महाराज द्वारा फटकारे जाने और श्राप दिए जाने के बावजूद, अपने व्रत में दृढ़ रहकर अपना सत्य नहीं छोड़ा। निश्चित ही धर्म के सिद्धांतों के बारे में मैंने छल से बात की, लेकिन उन्होंने धर्म नहीं छोड़ा, वो अपने वचन के पक्के हैं ।
 
Bali Maharaja, although bereft of wealth, ousted from his original position, defeated and imprisoned by his enemies, rebuked and forsaken by his relatives and friends, afflicted with the pain of being bound, and rebuked and cursed by his preceptor, remained steadfast in his vow. He did not abandon his truth. I certainly spoke deceitfully about Dharma, but he did not abandon his Dharma because he is a man of his word.
तात्पर्य
बाली महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण द्वारा उनके सामने रखी परीक्षा को आसानी से पार कर लिया। यह भगवान की भक्त के प्रति दया का प्रमाण है। कभी-कभी भगवान भक्त की अत्यंत कठोर परीक्षा ले लेते हैं जिसे सहना असंभव होता है। बाली महाराज पर जो परिस्थितियां लादी गईं, उनमें कोई भी जीवित नहीं रह सकता। बाली महाराज ने इन सभी परीक्षाओं और तपों को सहन किया जो भगवान की कृपा थी। भगवान भक्त के धैर्य की निश्चित रूप से सराहना करते हैं और भविष्य में भक्त के लिए यह गौरव का विषय होता है। यह एक सामान्य परीक्षा नहीं थी। जैसा कि इस श्लोक में वर्णित है, शायद ही कोई इस परीक्षा में सफल हो सकता है, लेकिन भगवान के महान भक्त बाली महाराज की भविष्य में प्रशंसा के लिए, भगवान ने न केवल उनकी परीक्षा ली, बल्कि उन्हें ये कठिनाइयों सहन करने की शक्ति भी दी। भगवान अपने भक्त के प्रति इतने दयालु होते हैं कि उसकी कठिन परीक्षा के दौरान वे उसे सहनशील होने और एक गौरवशाली भक्त बने रहने के लिए आवश्यक शक्ति देते हैं।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)