श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 8: ब्रह्माण्डीय सृष्टि का निवर्तन  »  अध्याय 22: बलि महाराज द्वारा आत्मसमर्पण  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  8.22.24 
श्रीभगवानुवाच
ब्रह्मन् यमनुगृह्णामि तद्विशो विधुनोम्यहम् ।
यन्मद: पुरुष: स्तब्धो लोकं मां चावमन्यते ॥ २४ ॥
 
 
अनुवाद
भगवान ने कहा: हे ब्रह्माजी, भौतिक संपन्नता के कारण मूर्ख व्यक्ति की बुद्धि कुंद हो जाती है और वह पागल हो जाता है। इस प्रकार वह तीनों लोकों में किसी का भी सम्मान नहीं करता और मेरी सत्ता को भी चुनौती देता है। ऐसे व्यक्ति पर सर्वप्रथम मैं विशेष कृपा करके उसकी सारी संपत्ति छीन लेता हूँ।
 
भगवान ने कहा: हे ब्रह्माजी, भौतिक संपन्नता के कारण मूर्ख व्यक्ति की बुद्धि कुंद हो जाती है और वह पागल हो जाता है। इस प्रकार वह तीनों लोकों में किसी का भी सम्मान नहीं करता और मेरी सत्ता को भी चुनौती देता है। ऐसे व्यक्ति पर सर्वप्रथम मैं विशेष कृपा करके उसकी सारी संपत्ति छीन लेता हूँ।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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