श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 8: ब्रह्माण्डीय सृष्टि का निवर्तन  »  अध्याय 22: बलि महाराज द्वारा आत्मसमर्पण  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  8.22.18 
श्रीशुक उवाच
तस्यानुश‍ृण्वतो राजन् प्रह्लादस्य कृताञ्जले: ।
हिरण्यगर्भो भगवानुवाच मधुसूदनम् ॥ १८ ॥
 
 
अनुवाद
श्री शुकदेव गोस्वामी ने आगे कहा: हे राजा परीक्षित! तब भगवान के पास हाथ जोड़कर खड़े प्रह्लाद महाराज को साक्षी मानकर ब्रह्मा जी कहने लगे।
 
श्री शुकदेव गोस्वामी ने आगे कहा: हे राजा परीक्षित! तब भगवान के पास हाथ जोड़कर खड़े प्रह्लाद महाराज को साक्षी मानकर ब्रह्मा जी कहने लगे।
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas