वरुण पाश से बँधे होने के कारण बलि महाराज प्रह्लाद महाराज को पहले की तरह सम्मान नहीं दे सके। उन्होंने केवल सिर झुकाकर प्रणाम किया, उनकी आँखों में आँसू थे और शर्म के कारण उनका सिर नीचा था।
Because Bali Maharaja was bound by the rope of Varuṇā, he was unable to offer his respects to Prahlāda Maharaja as before. He bowed down only with his head, his eyes were filled with tears and his head was lowered in shame.
तात्पर्य
महाराज बलि के भगवान वामनदेव के द्वारा बांधे जाने से निश्चित ही उन्हें अपराधी माना गया था। महाराज बलि ने गंभीरतापूर्वक महसूस किया कि वह भगवान के प्रति अपराधी थे। निश्चित ही महाराज प्रह्लाद को यह अच्छा नहीं लगेगा। इसलिए महाराज बलि लज्जित हो गए और अपना सिर लटका लिया।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥