Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 8.22.13: तब बलि महाराज ने अपने पितामह, परम भाग्यशाली प्रह्लाद महाराज को देखा। उनका श्यामल शरीर काजल के समान लग रहा था। उनका लंबा, सुंदर शरीर पीले वस्त्र से सुशोभित था। उनकी भुजाएँ लंबी थीं और उनकी सुंदर आँखें कमल की पंखुड़ियों के समान थीं। वे बहुत प्रिय और मोहक व्यक्तित्व वाले थे। | bhagavat अध्याय 8.22: बलि महाराज द्वारा आत्मसमर्पण । bhagavat स्कन्ध 8: ब्रह्माण्डीय सृष्टि का निवर्तन । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तब बलि महाराज ने अपने पितामह, परम भाग्यशाली प्रह्लाद महाराज को देखा। उनका श्यामल शरीर काजल के समान लग रहा था। उनका लंबा, सुंदर शरीर पीले वस्त्र से सुशोभित था। उनकी भुजाएँ लंबी थीं और उनकी सुंदर आँखें कमल की पंखुड़ियों के समान थीं। वे बहुत प्रिय और मोहक व्यक्तित्व वाले थे।
Bali Maharaja then saw his grandfather Prahlada Maharaja, a most fortunate person, whose dark complexion looked like eyeliner. His tall, majestic body was dressed in yellow clothing, his arms were long, and his beautiful eyes were like lotus petals. He was very beloved and charming to all.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥