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bhagavat 8.22.1: शुकदेव गोस्वामी ने कहा: हे राजा! यद्यपि दिखने में ऐसा लगा कि भगवान ने बलि महाराज के साथ दुर्व्यवहार किया है, पर बलि महाराज अपने संकल्प पर अटल थे। यह सोचते हुए कि मैंने अपना वादा पूरा नहीं किया है, उन्होंने इस तरह कहा।   |   bhagavat अध्याय 8.22: बलि महाराज द्वारा आत्मसमर्पण   ।   bhagavat स्कन्ध 8: ब्रह्माण्डीय सृष्टि का निवर्तन   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 8: ब्रह्माण्डीय सृष्टि का निवर्तन  »  अध्याय 22: बलि महाराज द्वारा आत्मसमर्पण  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  8.22.1 
श्रीशुक उवाच
एवं विप्रकृतो राजन् बलिर्भगवतासुर: ।
भिद्यमानोऽप्यभिन्नात्मा प्रत्याहाविक्लवं वच: ॥ १ ॥
 
 
अनुवाद
शुकदेव गोस्वामी ने कहा: हे राजा! यद्यपि दिखने में ऐसा लगा कि भगवान ने बलि महाराज के साथ दुर्व्यवहार किया है, पर बलि महाराज अपने संकल्प पर अटल थे। यह सोचते हुए कि मैंने अपना वादा पूरा नहीं किया है, उन्होंने इस तरह कहा।
 
Sukadeva Goswami said: O King! Although it appeared from the outside that the Lord had mistreated Bali Maharaja, Bali Maharaja was firm in his resolution. Thinking that I have not fulfilled my promise, he spoke as follows.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)