श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 8: ब्रह्माण्डीय सृष्टि का निवर्तन  »  अध्याय 21: भगवान् द्वारा बलि महाराज को बन्दी बनाया जाना  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  8.21.23 
भवद्भ‍िर्निर्जिता ह्येते बहुशोऽनुचरा हरे: ।
दैवेनर्द्धैस्त एवाद्य युधि जित्वा नदन्ति न: ॥ २३ ॥
 
 
अनुवाद
इससे पहले, भाग्य की शक्ति से आपने भगवान विष्णु के अनेक अनुयायियों को परास्त किया था। पर आज वे ही अनुयायी, हमें परास्त करके शेरों की तरह हर्ष से दहाड़ रहे हैं।
 
इससे पहले, भाग्य की शक्ति से आपने भगवान विष्णु के अनेक अनुयायियों को परास्त किया था। पर आज वे ही अनुयायी, हमें परास्त करके शेरों की तरह हर्ष से दहाड़ रहे हैं।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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