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श्लोक 8.21.20  |
य: प्रभु: सर्वभूतानां सुखदु:खोपपत्तये ।
तं नातिवर्तितुं दैत्या: पौरुषैरीश्वर: पुमान् ॥ २० ॥ |
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| अनुवाद |
| हे दानवों ! मानवीय प्रयत्नों से कोई भी उस परम पुरुष को पार नहीं कर सकता जो सभी जीवों को सुख और दुख देता है। |
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| हे दानवों ! मानवीय प्रयत्नों से कोई भी उस परम पुरुष को पार नहीं कर सकता जो सभी जीवों को सुख और दुख देता है। |
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