श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 8: ब्रह्माण्डीय सृष्टि का निवर्तन  »  अध्याय 21: भगवान् द्वारा बलि महाराज को बन्दी बनाया जाना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  8.21.14 
ते सर्वे वामनं हन्तुं शूलपट्टिशपाणय: ।
अनिच्छन्तो बले राजन् प्राद्रवञ्जातमन्यव: ॥ १४ ॥
 
 
अनुवाद
हे राजा! आसूरी लोग सामान्य क्रोध के आवेश में आकर अपने-अपने भाले और त्रिशूल हाथों में ले लिये और बलि महाराज की इच्छा के विरुद्ध भगवान वामनदेव को मारने को आगे बढ़े।
 
हे राजा! आसूरी लोग सामान्य क्रोध के आवेश में आकर अपने-अपने भाले और त्रिशूल हाथों में ले लिये और बलि महाराज की इच्छा के विरुद्ध भगवान वामनदेव को मारने को आगे बढ़े।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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