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श्लोक 8.21.14  |
ते सर्वे वामनं हन्तुं शूलपट्टिशपाणय: ।
अनिच्छन्तो बले राजन् प्राद्रवञ्जातमन्यव: ॥ १४ ॥ |
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| अनुवाद |
| हे राजा! आसूरी लोग सामान्य क्रोध के आवेश में आकर अपने-अपने भाले और त्रिशूल हाथों में ले लिये और बलि महाराज की इच्छा के विरुद्ध भगवान वामनदेव को मारने को आगे बढ़े। |
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| हे राजा! आसूरी लोग सामान्य क्रोध के आवेश में आकर अपने-अपने भाले और त्रिशूल हाथों में ले लिये और बलि महाराज की इच्छा के विरुद्ध भगवान वामनदेव को मारने को आगे बढ़े। |
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