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श्लोक 8.21.12  |
सत्यव्रतस्य सततं दीक्षितस्य विशेषत: ।
नानृतं भाषितुं शक्यं ब्रह्मण्यस्य दयावत: ॥ १२ ॥ |
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| अनुवाद |
| हमारे स्वामी बलि महाराज हमेशा सत्य पर अटल रहते हैं, और विशेष रूप से इस समय तो और भी अधिक, क्योंकि उन्हें यज्ञ करने की दीक्षा दी गई है। वे ब्राह्मणों के प्रति हमेशा दयालु एवं मृदुभाषी रहते हैं और कभी भी झूठ नहीं बोल सकते। |
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| हमारे स्वामी बलि महाराज हमेशा सत्य पर अटल रहते हैं, और विशेष रूप से इस समय तो और भी अधिक, क्योंकि उन्हें यज्ञ करने की दीक्षा दी गई है। वे ब्राह्मणों के प्रति हमेशा दयालु एवं मृदुभाषी रहते हैं और कभी भी झूठ नहीं बोल सकते। |
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