चतुर्विधा भजन्ते माँ
जना: सुकृतिनोऽर्जुन
आर्तो जिज्ञासुरर्थार्थी
ज्ञानि च भरतर्षभ
चार प्रकार के धर्मी व्यक्ति - अर्थात जो संकट में है, जिसे धन की आवश्यकता है, जो ज्ञान की तलाश में है, और जो जिज्ञासु है - वे बचने या उन्नति करने के लिए भगवान की शरण लेना शुरू करते हैं। हाथियों का राजा, अपने खतरनाक स्थिति में, भगवान के कमल चरणों की शरण लेने का फैसला किया। काफी विचार करने के बाद, वह बुद्धिमानी से इस सही निर्णय पर पहुंचा। ऐसा निर्णय एक पापी व्यक्ति द्वारा नहीं लिया जाता है। इसलिए भगवद्-गीता में कहा गया है कि जो लोग धर्मी (सुकृती) हैं वे यह तय कर सकते हैं कि एक खतरनाक या अजीब सी स्थिति में व्यक्ति को भगवान श्री कृष्ण के कमल चरणों की शरण लेनी चाहिए।
