Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 8.2.27: हे राजन, भाग्य के फेर से एक बलवान मगरमच्छ ने, जो हाथी से रुष्ट था, जल के भीतर से ही हाथी के पैर पर आक्रमण कर दिया। हाथी निश्चय ही शक्तिशाली था और उसने भाग्य के द्वारा भेजे गए इस संकट से अपनी सामर्थ्य भर स्वयं को छुड़ाने का यत्न किया। | bhagavat अध्याय 8.2: गजेन्द्र का संकट । bhagavat स्कन्ध 8: ब्रह्माण्डीय सृष्टि का निवर्तन । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
हे राजन, भाग्य के फेर से एक बलवान मगरमच्छ ने, जो हाथी से रुष्ट था, जल के भीतर से ही हाथी के पैर पर आक्रमण कर दिया। हाथी निश्चय ही शक्तिशाली था और उसने भाग्य के द्वारा भेजे गए इस संकट से अपनी सामर्थ्य भर स्वयं को छुड़ाने का यत्न किया।
O King! Fortunately, a strong crocodile, which was angry with the elephant, attacked the elephant's leg from within the water. The elephant was certainly strong and he tried with all his might to free himself from this danger sent by fate.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥