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bhagavat 8.2.26: किसी आध्यात्मिक ज्ञान से वंचित और अपने परिवार के लोगों के प्रति अत्यधिक आसक्त व्यक्ति की तरह हाथी भी कृष्ण की बाहरी शक्ति (माया) से भ्रमित होकर अपनी पत्नियों और बच्चों को नहलाया और पानी पिलाया। उसने अपनी सूंड में झील से पानी भरा और उन सब पर छिड़का। उसे इस कार्य में लगने वाली कड़ी मेहनत की परवाह नहीं थी।   |   bhagavat अध्याय 8.2: गजेन्द्र का संकट   ।   bhagavat स्कन्ध 8: ब्रह्माण्डीय सृष्टि का निवर्तन   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 8: ब्रह्माण्डीय सृष्टि का निवर्तन  »  अध्याय 2: गजेन्द्र का संकट  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  8.2.26 
स पुष्करेणोद्‌धृतशीकराम्बुभि-
र्निपाययन्संस्‍नपयन्यथा गृही ।
घृणी करेणु: करभांश्च दुर्मदो
नाचष्ट कृच्छ्रं कृपणोऽजमायया ॥ २६ ॥
 
 
अनुवाद
किसी आध्यात्मिक ज्ञान से वंचित और अपने परिवार के लोगों के प्रति अत्यधिक आसक्त व्यक्ति की तरह हाथी भी कृष्ण की बाहरी शक्ति (माया) से भ्रमित होकर अपनी पत्नियों और बच्चों को नहलाया और पानी पिलाया। उसने अपनी सूंड में झील से पानी भरा और उन सब पर छिड़का। उसे इस कार्य में लगने वाली कड़ी मेहनत की परवाह नहीं थी।
 
Like a man devoid of spiritual knowledge and overly attached to his family, the elephant, enchanted by Krishna's external power (maya), bathed and watered his wife and children. He filled his trunk with water from the lake and sprinkled it over them, not caring about the hard labor involved in this effort.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)