Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 8.2.25: गजराज ने उस सरोवर में प्रवेश किया, अच्छी तरह से स्नान किया और अपने थकावट से निवृत्त हो गया। उसके बाद, उसने अपनी सूँड़ से कमल तथा जलकुमुदिनी के पराग से मिश्रित ठंडे, स्वच्छ और अमृत के समान पानी को भरपूर मात्रा में पीया, जब तक कि वह पूर्ण रूप से संतुष्ट न हो गया। | bhagavat अध्याय 8.2: गजेन्द्र का संकट । bhagavat स्कन्ध 8: ब्रह्माण्डीय सृष्टि का निवर्तन । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
गजराज ने उस सरोवर में प्रवेश किया, अच्छी तरह से स्नान किया और अपने थकावट से निवृत्त हो गया। उसके बाद, उसने अपनी सूँड़ से कमल तथा जलकुमुदिनी के पराग से मिश्रित ठंडे, स्वच्छ और अमृत के समान पानी को भरपूर मात्रा में पीया, जब तक कि वह पूर्ण रूप से संतुष्ट न हो गया।
The king of elephants (Gajpati Gajendra) entered the lake, bathed thoroughly and got rid of his fatigue. Then he drank to his heart's content the cool, clear, nectar-like water mixed with the dust of lotus flowers and water lilies.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥