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निशम्य तद्वधं भ्राता हिरण्यकशिपु: पुरा ।
हन्तुं भ्रातृहणं क्रुद्धो जगाम निलयं हरे: ॥ ७ ॥
अनुवाद
जब हिरण्यकशिपु ने अपने भाई की हत्या की खबर सुनी तब वह बड़ा क्रोधित हुआ और अपने भाई के हत्यारे विष्णु को मारने उनके निवास स्थान पर जा पहुँचा।
When Hiranyakshipu heard that his brother had been killed, he became very angry and went to the abode of Vishnu, the murderer of his brother, to kill him.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥