Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 8.19.43: अपने वश में लाने के लिए किसी स्त्री से प्यार भरी बातें करने में, हँसी-मजाक में, विवाह के अवसर पर, अपनी आजीविका कमाने में, जब जान का खतरा हो, गायों और ब्राह्मण संस्कृति की रक्षा करने में, या किसी व्यक्ति की दुश्मन के हाथों से रक्षा करने में झूठ भी कभी निंदनीय नहीं माना जाता है। | bhagavat अध्याय 8.19: बलि महाराज से वामनदेव द्वारा दान की याचना । bhagavat स्कन्ध 8: ब्रह्माण्डीय सृष्टि का निवर्तन । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अपने वश में लाने के लिए किसी स्त्री से प्यार भरी बातें करने में, हँसी-मजाक में, विवाह के अवसर पर, अपनी आजीविका कमाने में, जब जान का खतरा हो, गायों और ब्राह्मण संस्कृति की रक्षा करने में, या किसी व्यक्ति की दुश्मन के हाथों से रक्षा करने में झूठ भी कभी निंदनीय नहीं माना जाता है।
Speaking a lie in a flirtatious manner to bring a woman under one's control, in jest, during a wedding, while earning one's livelihood, in a life-threatening situation, in protecting cows and Brahmin culture, or in protecting a person from the hands of the enemy is never reprehensible.
इस प्रकार श्रीमद् भागवतम के स्कन्ध आठ के अंतर्गत उन्नीसवाँ अध्याय समाप्त होता है ।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥