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bhagavat 8.19.38: कोई यह तर्क कर सकता है कि क्योंकि आपने पहले ही वचन दे दिया है तब कैसे मना कर सकते हो? हे राक्षसों में श्रेष्ठ! आप मुझसे बह्वृच-श्रुति का प्रमाण ले सकते हैं जो कहती है कि जिस वचन की शुरुआत ॐ से होती है वह सत्य है और जिस वचन की शुरुआत ॐ से नहीं होती वह असत्य है।   |   bhagavat अध्याय 8.19: बलि महाराज से वामनदेव द्वारा दान की याचना   ।   bhagavat स्कन्ध 8: ब्रह्माण्डीय सृष्टि का निवर्तन   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 8: ब्रह्माण्डीय सृष्टि का निवर्तन  »  अध्याय 19: बलि महाराज से वामनदेव द्वारा दान की याचना  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  8.19.38 
अत्रापि बह्वृचैर्गीतं श‍ृणु मेऽसुरसत्तम ।
सत्यमोमिति यत् प्रोक्तं यन्नेत्याहानृतं हि तत् ॥ ३८ ॥
 
 
अनुवाद
कोई यह तर्क कर सकता है कि क्योंकि आपने पहले ही वचन दे दिया है तब कैसे मना कर सकते हो? हे राक्षसों में श्रेष्ठ! आप मुझसे बह्वृच-श्रुति का प्रमाण ले सकते हैं जो कहती है कि जिस वचन की शुरुआत ॐ से होती है वह सत्य है और जिस वचन की शुरुआत ॐ से नहीं होती वह असत्य है।
 
One may argue that since you have already given your word, how can you refuse now? O best of the demons, you can take from me the evidence of the Bahvricha-Shruti which states that a word is true which begins with Om; it is false which does not begin with Om.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)