तुमने उन्हें दान में तीन पग भूमि देने का वादा किया है, किंतु जब तुम वह दान करोगे तो वह तीनों लोकों में अधिकार कर लेगा। तुम बड़े मूर्ख हो। तुम नहीं समझते कि तुमने कितनी बड़ी भूल की है। भगवान विष्णु को सब कुछ दान कर देने के बाद तुम्हारे पास जीविका का कोई साधन नहीं रहेगा। तब तुम कैसे रहोगे?
You have promised to give them three steps of land in charity, but when you give it away they will claim all the three worlds. You are a total fool. You do not know what a big mistake you have made. If you give everything to Lord Vishnu you will have no means of livelihood. How will you live then?
तात्पर्य
बली महाराज के तर्क कि उन्होंने केवल तीन पग भूमि देने का वादा किया था को शुक्राचार्य, जो कि अति विद्वान ब्राह्मण थे, तुरंत समझ गए कि यह हरी की ही एक योजना है जो कि यहाँ एक ब्रह्मचारी के रूप में प्रकट हुए हैं। "मूढ़ वर्तिष्यसे कथम्" शब्दों से ही विदित होता है कि शुक्राचार्य एक ऋत्विज वर्ग के ब्राह्मण थे। इस प्रकार के ऋत्विज ब्राह्मण अपने शिष्यों से पारितोषिक पाने में ही अधिक रूचि रखते हैं। अतः जब शुक्राचार्य ने देखा कि बली महाराज ने अपनी सारी सम्पत्ति दाँव पर लगा दी है तो उन्होंने समझ लिया कि इससे न केवल राजा को ही हानि होगी अपितु शुक्राचार्य के परिवार को भी हानि होगी क्योंकि वह महाराज बली की कृपा पर निर्भर थे। यही वैष्णव और स्मार्त ब्राह्मण में अंतर है। एक स्मार्त ब्राह्मण सदैव भौतिक लाभ लेने में रूचि रखता है जबकि एक वैष्णव केवल परमपुरुष भगवान को संतुष्ट करने में रूचि रखता है। शुक्राचार्य के इस कथन से प्रतीत होता है कि वे हर प्रकार से स्मार्त ब्राह्मण थे जिनकी रूचि केवल अपने व्यक्तिगत लाभ में थी।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥