Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 8.19.31: तुमको इस बात का अंदाजा नहीं है कि भूमि देने का वचन देकर तुमने कितनी ख़तरनाक परिस्थिति का सामना किया है। मेरे विचार से ये तुम्हारे लिए अच्छा नहीं है। इससे राक्षसों को भारी नुक़सान होगा। | bhagavat अध्याय 8.19: बलि महाराज से वामनदेव द्वारा दान की याचना । bhagavat स्कन्ध 8: ब्रह्माण्डीय सृष्टि का निवर्तन । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
प्रतिश्रुतं त्वयैतस्मै यदनर्थमजानता ।
न साधु मन्ये दैत्यानां महानुपगतोऽनय: ॥ ३१ ॥
अनुवाद
तुमको इस बात का अंदाजा नहीं है कि भूमि देने का वचन देकर तुमने कितनी ख़तरनाक परिस्थिति का सामना किया है। मेरे विचार से ये तुम्हारे लिए अच्छा नहीं है। इससे राक्षसों को भारी नुक़सान होगा।
You are not able to understand what a dangerous situation you have accepted by promising to give them the land. In my opinion, this promise (promise) is not good for you. This will cause great harm to the demons.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥