Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 8.19.28: शुकदेव गोस्वामी ने फिर कहा: जब भगवान् ने बलि महाराज से इस प्रकार कहा तो बलि हँस पड़े और बोले, "अच्छा, जो भी इच्छा हो प्राप्त करो।" इसके बाद वामनदेव को इच्छित भूमि देने के संकेत में उन्होंने अपने कमंडल को उठाया। | bhagavat अध्याय 8.19: बलि महाराज से वामनदेव द्वारा दान की याचना । bhagavat स्कन्ध 8: ब्रह्माण्डीय सृष्टि का निवर्तन । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
श्रीशुक उवाच
इत्युक्त: स हसन्नाह वाञ्छात: प्रतिगृह्यताम् ।
वामनाय महीं दातुं जग्राह जलभाजनम् ॥ २८ ॥
अनुवाद
शुकदेव गोस्वामी ने फिर कहा: जब भगवान् ने बलि महाराज से इस प्रकार कहा तो बलि हँस पड़े और बोले, "अच्छा, जो भी इच्छा हो प्राप्त करो।" इसके बाद वामनदेव को इच्छित भूमि देने के संकेत में उन्होंने अपने कमंडल को उठाया।
Sukadeva Gosvami continued: When the Lord spoke to Bali Maharaja in this way, Bali laughed and said, "Very well. Now obtain whatever you desire." He raised his waterpot to confirm His promise to give Vamanadeva the desired land.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥