|
| |
| |
श्लोक 8.19.20  |
न पुमान् मामुपव्रज्य भूयो याचितुमर्हति ।
तस्माद् वृत्तिकरीं भूमिं वटो कामं प्रतीच्छ मे ॥ २० ॥ |
| |
| |
| अनुवाद |
| हे बेटा! जो मेर पास कुछ माँगने के लिए एक बार आता है उसे और कहीं कुछ माँगने की आवश्यकता नहीं रहती। इसलिए, तुम चाहो तो मुझसे उतनी जमीन माँग सकते हो जितनी तुम्हारे रहन-सहन के लिए आवश्यक हो। |
| |
| हे बेटा! जो मेर पास कुछ माँगने के लिए एक बार आता है उसे और कहीं कुछ माँगने की आवश्यकता नहीं रहती। इसलिए, तुम चाहो तो मुझसे उतनी जमीन माँग सकते हो जितनी तुम्हारे रहन-सहन के लिए आवश्यक हो। |
| ✨ ai-generated |
| |
|