श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 8: ब्रह्माण्डीय सृष्टि का निवर्तन  »  अध्याय 19: बलि महाराज से वामनदेव द्वारा दान की याचना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  8.19.17 
नान्यत् ते कामये राजन्वदान्याज्जगदीश्वरात् ।
नैन: प्राप्नोति वै विद्वान्यावदर्थप्रतिग्रह: ॥ १७ ॥
 
 
अनुवाद
हे समग्र ब्रह्माण्ड के नियंत्रक, राजा! यद्यपि आप अत्यंत उदार हैं तथा मुझे इच्छानुसार जितनी भूमि चाहिए, दे सकते हैं, किंतु मैं आपसे ऐसी कोई अनावश्यक वस्तु नहीं माँगना चाहता। यदि कोई विद्वान ब्राह्मण अन्यों से अपने आवश्यकतानुसार दान लेता है तो वह पापपूर्ण कर्मों में नहीं फँसता।
 
हे समग्र ब्रह्माण्ड के नियंत्रक, राजा! यद्यपि आप अत्यंत उदार हैं तथा मुझे इच्छानुसार जितनी भूमि चाहिए, दे सकते हैं, किंतु मैं आपसे ऐसी कोई अनावश्यक वस्तु नहीं माँगना चाहता। यदि कोई विद्वान ब्राह्मण अन्यों से अपने आवश्यकतानुसार दान लेता है तो वह पापपूर्ण कर्मों में नहीं फँसता।
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd