एवं स निश्चित्य रिपो: शरीर-
माधावतो निर्विविशेऽसुरेन्द्र ।
श्वासानिलान्तर्हितसूक्ष्मदेह-
स्तत्प्राणरन्ध्रेण विविग्नचेता: ॥ १० ॥
अनुवाद
भगवान् वामनदेव ने आगे कहा: हे असुर राजा! यह निर्णय लेने के बाद भगवान् विष्णु अपने पीछे तेजी से दौड़ रहे अपने शत्रु हिरण्यकशिपु के शरीर में प्रवेश कर गये। सूक्ष्म शरीर में रहकर, जिसकी हिरण्यकशिपु कल्पना भी नहीं कर सकता था, चिंतामग्न भगवान् विष्णु हिरण्यकशिपु की श्वास के साथ उसके नथुने में प्रविष्ट हो गये।
Lord Vamandev further said: O demon king! After this decision, the Lord entered the body of His enemy Hiranyakashipu who was running fast behind Him. Taking a subtle body which Hiranyakashipu could not even imagine, the worried Lord Vishnu entered his nostrils along with his breath.
तात्पर्य
परमात्मा पहले से ही हर किसी के हृदय में विराजमान है। ईश्वरः सर्वभूतानां हृद्देशेअर्जुन तिष्ठति (भगवद्गीता १८.६१)। इसलिए, तार्किक रूप से भगवान विष्णु के लिए हिरण्यकशिपु के शरीर में प्रवेश करना बिल्कुल भी कठिन नहीं था। विविक्षण-चेताः,'अत्यंत चिंतित,' शब्द सार्थक है। इसका यह अर्थ नहीं है कि भगवान विष्णु, हिरण्यकशिपु से डरते थे; बल्कि, करुणा के कारण, भगवान विष्णु को इस बात की चिंता सता रही थी कि उनके भले के लिए कैसे कार्य किया जाए।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥