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श्रीबलिरुवाच
स्वागतं ते नमस्तुभ्यं ब्रह्मन्किं करवाम ते ।
ब्रह्मर्षीणां तप: साक्षान्मन्ये त्वार्य वपुर्धरम् ॥ २९ ॥
अनुवाद
तब बलि महाराजा ने वामनदेव से कहा: हे ब्राह्मण! मैं आपको हार्दिक स्वागत करता हूँ और आपको सादर नमस्कार करता हूँ। कृपया बतायें कि हम आपके लिए क्या करें? हम आपको ब्रह्मर्षियों की तपस्या का साकार रूप मानते हैं।
Then Bali Maharaja said to Vamanadeva: O Brahmin! I heartily welcome you and offer my respectful obeisances unto you. Please tell me what we should do for you? We consider you to be the embodiment of the penance of the brahmarshis.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥