श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 8: ब्रह्माण्डीय सृष्टि का निवर्तन  »  अध्याय 18: भगवान् वामनदेव : वामन अवतार  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  8.18.13 
तं वटुं वामनं द‍ृष्ट्वा मोदमाना महर्षय: ।
कर्माणि कारयामासु: पुरस्कृत्य प्रजापतिम् ॥ १३ ॥
 
 
अनुवाद
जब महान ऋषियों ने भगवान को वामन रूप में देखा, वे बेहद प्रसन्न हुए। फिर उन्होंने प्रजापति कश्यपमुनि को आगे करके जन्म संस्कार जैसे सारे अनुष्ठान पूरे किए।
 
When the sages saw the Lord in the form of Brahmachari Vaman, they were certainly extremely pleased. Therefore, they performed all the rituals like birth rituals by leading Prajapati Kashyap Muni.
तात्पर्य
वैदिक सभ्यता के अनुसार, जब ब्राह्माण के घर में शिशु का जन्म होता है, तो सबसे पहले जात-कर्म नामक जन्म-संस्कार संपन्न कराया जाता है, फिर क्रमानुसार दूसरे संस्कार भी होते हैं। किंतु जब वामन-रूप में वटु (ब्रह्मचारी) के रूप में अवतार हुआ तब उनका यज्ञोपवीत संस्कार भी तत्काल संपन्न कराया गया।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)