श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 8: ब्रह्माण्डीय सृष्टि का निवर्तन  »  अध्याय 18: भगवान् वामनदेव : वामन अवतार  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  8.18.12 
यत् तद् वपुर्भाति विभूषणायुधै-
रव्यक्तचिद्वय‍क्तमधारयद्धरि: ।
बभूव तेनैव स वामनो वटु:
सम्पश्यतोर्दिव्यगतिर्यथा नट: ॥ १२ ॥
 
 
अनुवाद
भगवान अपने मूल स्वरूप में, आभूषण और हथियार लिए, प्रकट हुए। यद्यपि यह सदाबहार रूप भौतिक दुनिया में दिखाई नहीं देता, तो भी वे इसी रूप में प्रकट हुए। इसके पश्चात्, माता-पिता की उपस्थिति में, उन्होंने उसी तरह ब्राह्मण वामन अर्थात् ब्रह्मचारी का रूप धारण कर लिया जिस तरह कोई अभिनेता करता है।
 
The Lord appeared in His original form, wearing ornaments and holding weapons in His hands. Although this eternal form of His is not visible in the material world, He still appeared in this form. Thereafter, in the presence of His parents, He assumed the form of the brahmin Vamana, that is, a brahmacari, just as an actor would do.
तात्पर्य
नटः शब्द महत्वपूर्ण है। एक अभिनेता अलग-अलग भूमिकाएँ निभाने के लिए पोशाक बदलता है, लेकिन हमेशा एक ही आदमी होता है। इसी तरह, जैसा कि ब्रह्म-संहिता में वर्णित है कि भगवान अनेक हजारों और लाखों रूप धारण करते हैं। वह हमेशा असंख्य अवतारों के साथ उपस्थित रहते हैं। फिर भी, यद्यपि वह विभिन्न अवतारों में प्रकट होते हैं, वे एक दूसरे से भिन्न नहीं हैं। वह एक ही व्यक्ति हैं, एक ही सामर्थ्य के साथ, एक ही सनातनता के साथ और एक ही आध्यात्मिक अस्तित्व के साथ, लेकिन वह विभिन्न रूपों को धारण कर सकते हैं। जब वामनदेव अपनी माँ के गर्भ से प्रकट हुए, तो वे नारायण के रूप में प्रकट हुए, जिसमें आवश्यक प्रतीकात्मक हथियारों से लैस चार हाथ थे, और फिर तुरंत खुद को एक ब्रह्मचारी (वटु) में बदल लिया। इसका मतलब है कि उनका शरीर भौतिक नहीं है। जो यह सोचता है कि सर्वोच्च भगवान भौतिक शरीर धारण करते हैं, वह बुद्धिमान नहीं है। उसे भगवान की स्थिति के बारे में अधिक सीखना होगा। जैसा कि भगवद्-गीता में पुष्टि की गई है कि जन्म कर्म च मे दिव्यं एवम् यो वेत्ति तत्वतः। व्यक्ति को भगवान की मूल पारलौकिक शरीर में उनकी पारलौकिक उपस्थिति को समझना होगा।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)