सिद्धांत बलिया चित्ते ना कर अलसा
इहा हइते कृष्णे लागे सुदृढ मानसा
कोई भी जो पूरी तरह से कृष्ण को जानना चाहता है, उसे प्रभु के गौरव को समझना चाहिए जितना संभव हो। यहाँ अदिति इन गौरवों का संकेत देती है। ब्रम्हांड प्रभु की बाहरी शक्ति के अलावा कुछ नहीं है। भगवद्-गीता (9.4) में इसकी पुष्टि की गई है: माया ततम इदं सर्वम्। यह ब्रम्हांड जो भी हम देखते हैं वह भगवान के व्यक्तित्व की शक्ति का विस्तार है, जैसे पूरे ब्रह्मांड में धूप और गर्मी सूर्य के विस्तार हैं। जब कोई सर्वोच्च व्यक्तित्व के आत्मसमर्पण करता है, तो वह आभासमान ऊर्जा के प्रभाव को पार कर जाता है, क्योंकि सर्वोच्च भगवान, पूरी तरह से बुद्धिमान होने के कारण और हर किसी के दिल में विशेष रूप से भक्त के दिल में स्थित होने के कारण, बुद्धि देता है जिससे वह निश्चित रूप से भ्रम में कभी नहीं पड़ता।
