सर्वप्रथम भक्त को द्वादश अक्षर मंत्र का जाप करना चाहिए और भगवान को फूल माला, अगुरु आदि अर्पित करना चाहिए। इस प्रकार से भगवान की पूजा करने के पश्चात भगवान को दूध से स्नान कराना चाहिए और उन्हें उचित वस्त्र तथा यज्ञोपवीत पहनाकर आभूषणों से सजाना चाहिए। तत्पश्चात भगवान के चरणों को धोने के लिए जल अर्पित करना चाहिए और सुगंधित पुष्प, अगरबत्ती इत्यादि सामग्री से भगवान की पुन: पूजा करनी चाहिए।
First of all, the devotee should chant the Dwadasha Akshar Mantra and offer garland of flowers, aguru etc. After worshipping the Lord in this manner, the Lord should be bathed with milk and adorned with appropriate clothes and Yajnopaveet (Janeu) and ornaments. After that, water should be offered to wash the feet of the Lord and the Lord should be worshipped again with fragrant flowers, aguru and other materials.
तात्पर्य
द्वादशाक्षर-मंत्र है ॐ नमो भगवते वासुदेवाय। भगवान की आराधना करते समय व्यक्ति को बाएं हाथ से घंटी बजानी चाहिए और पाद्य, अर्घ्य, वस्त्र, गंध, माला, आभरण, भूषण इत्यादि चढ़ाना चाहिए। इस तरह से व्यक्ति भगवान को दूध से नहलाए, उन्हें वस्त्र पहनाए और फिर से सभी परिकरों के साथ उनकी पूजा करें।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥