Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 8.16.27: हे माता पृथ्वी! तुमने ठहरने के लिए स्थान पाने की इच्छा की थी, तब भगवान ने वराह के रूप में तुम्हें ऊपर निकाला था। मैं प्रार्थना करता हूँ कि तुम कृपया मेरे पापी जीवन के सारे फलों को नष्ट कर दो। मैं तुम्हें सादर नमस्कार करता हूँ। | bhagavat अध्याय 8.16: पयोव्रत पूजा विधि का पालन करना । bhagavat स्कन्ध 8: ब्रह्माण्डीय सृष्टि का निवर्तन । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
त्वं देव्यादिवराहेण रसाया: स्थानमिच्छता ।
उद्धृतासि नमस्तुभ्यं पाप्मानं मे प्रणाशय ॥ २७ ॥
अनुवाद
हे माता पृथ्वी! तुमने ठहरने के लिए स्थान पाने की इच्छा की थी, तब भगवान ने वराह के रूप में तुम्हें ऊपर निकाला था। मैं प्रार्थना करता हूँ कि तुम कृपया मेरे पापी जीवन के सारे फलों को नष्ट कर दो। मैं तुम्हें सादर नमस्कार करता हूँ।
O Mother Earth! When you desired to find a place to stay, God brought you up in the form of Varaah. I pray that you kindly destroy all the fruits of my sinful life. I offer my respectful obeisances unto you.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥