Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
bhagavat 8.16.17: हे सर्वश्रेष्ठ साधुओं में श्रेष्ठ, सर्वोत्तम शुभ आशीर्वाद प्रदान करने वालों में सर्वोत्तम! हमारी स्थिति पर ध्यान दें और मेरे पुत्रों को ऐसा वर प्रदान करें जिससे वे अपनी खोई हुई वस्तुओं को पुनः प्राप्त कर सकें।   |   bhagavat अध्याय 8.16: पयोव्रत पूजा विधि का पालन करना   ।   bhagavat स्कन्ध 8: ब्रह्माण्डीय सृष्टि का निवर्तन   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 8: ब्रह्माण्डीय सृष्टि का निवर्तन  »  अध्याय 16: पयोव्रत पूजा विधि का पालन करना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  8.16.17 
यथा तानि पुन: साधो प्रपद्येरन् ममात्मजा: ।
तथा विधेहि कल्याणं धिया कल्याणकृत्तम ॥ १७ ॥
 
 
अनुवाद
हे सर्वश्रेष्ठ साधुओं में श्रेष्ठ, सर्वोत्तम शुभ आशीर्वाद प्रदान करने वालों में सर्वोत्तम! हमारी स्थिति पर ध्यान दें और मेरे पुत्रों को ऐसा वर प्रदान करें जिससे वे अपनी खोई हुई वस्तुओं को पुनः प्राप्त कर सकें।
 
O best of sages, O most auspicious one! Please consider our situation and grant my sons such a boon that they may regain their lost possessions.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)