तस्मादीश भजन्त्या मे श्रेयश्चिन्तय सुव्रत ।
हृतश्रियो हृतस्थानान्सपत्नै: पाहि न: प्रभो ॥ १५ ॥
अनुवाद
हे भद्र स्वामी! अपनी दासी पर दयालुतापूर्वक अनुग्रह प्रदान कीजिये। हमारी प्रतिद्वंद्वी राक्षसों ने हमें हमारे वैभव और आवास से वंचित कर दिया है। कृपा करके हमें अपनी सुरक्षा प्रदान करें।
Therefore, O noble lord, be kind to your maidservant. Our rival demons have now deprived us of wealth and home. Kindly grant us protection.
तात्पर्य
अर्धदेवों की माता अदिति ने कश्यप मुनि से अर्धदेवों की रक्षा करने की प्रार्थना की। जब हम अर्धदेवों की बात करते हैं, तो इसमें उनकी माँ भी शामिल होती है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥