को नु मे भगवन्कामो न सम्पद्येत मानस: ।
यस्या भवान्प्रजाध्यक्ष एवं धर्मान्प्रभाषते ॥ १३ ॥
अनुवाद
हे प्रभु! आप एक प्रजापति हैं और धर्म सिद्धांतों के पालन में स्वयं मेरे गुरु हैं, तो फिर ऐसे में यह कैसे संभव हो सकता है कि मेरी सभी इच्छाएँ पूरी न हों?
O Swami, when you are Prajapati and you are personally my teacher in following the principles of Dharma, then how is it possible that my desires will not be fulfilled?
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥