Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 8.15.8-9: तब, शुक्राचार्य द्वारा दिए गए रथ पर सवार होकर सुंदर माला से सजे बलि महाराज ने अपने शरीर पर सुरक्षा कवच धारण किया, अपने-आपको बाणों से लैस किया, एक तलवार और तीरों से भरा तरकश लिया। जब वे रथ में आसन ग्रहण कर चुके तो सुनहरे कड़ों से सजी बाहों और माणिक्य मणि के कुंडल पहने हुए कानों सहित वे पूजनीय अग्नि की तरह चमक रहे थे। | bhagavat अध्याय 8.15: बलि महाराज द्वारा स्वर्गलोक पर विजय । bhagavat स्कन्ध 8: ब्रह्माण्डीय सृष्टि का निवर्तन । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तब, शुक्राचार्य द्वारा दिए गए रथ पर सवार होकर सुंदर माला से सजे बलि महाराज ने अपने शरीर पर सुरक्षा कवच धारण किया, अपने-आपको बाणों से लैस किया, एक तलवार और तीरों से भरा तरकश लिया। जब वे रथ में आसन ग्रहण कर चुके तो सुनहरे कड़ों से सजी बाहों और माणिक्य मणि के कुंडल पहने हुए कानों सहित वे पूजनीय अग्नि की तरह चमक रहे थे।
Then Bali Maharaja mounted the chariot provided by Shukracharya, adorned with a beautiful garland, put on protective armor, armed himself with arrows, took a sword and quiver. When he had taken his seat in the chariot, with his arms adorned with golden bangles and ears adorned with emerald earrings, he shone like a sacred fire.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥