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bhagavat 8.15.4: भृगुमुनि के वंशज ब्राह्मण, बलि महाराज पर बहुत प्रसन्न थे, जो इन्द्र का राज्य जीतना चाहते थे। इसलिए, उन्होंने उन्हें अनुष्ठान के अनुसार शुद्ध किया और स्नान करवाया, और फिर उन्हें विश्वजित नामक यज्ञ करने में लगा दिया।   |   bhagavat अध्याय 8.15: बलि महाराज द्वारा स्वर्गलोक पर विजय   ।   bhagavat स्कन्ध 8: ब्रह्माण्डीय सृष्टि का निवर्तन   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 8: ब्रह्माण्डीय सृष्टि का निवर्तन  »  अध्याय 15: बलि महाराज द्वारा स्वर्गलोक पर विजय  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  8.15.4 
तं ब्राह्मणा भृगव: प्रीयमाणा
अयाजयन्विश्वजिता त्रिणाकम् ।
जिगीषमाणं विधिनाभिषिच्य
महाभिषेकेण महानुभावा: ॥ ४ ॥
 
 
अनुवाद
भृगुमुनि के वंशज ब्राह्मण, बलि महाराज पर बहुत प्रसन्न थे, जो इन्द्र का राज्य जीतना चाहते थे। इसलिए, उन्होंने उन्हें अनुष्ठान के अनुसार शुद्ध किया और स्नान करवाया, और फिर उन्हें विश्वजित नामक यज्ञ करने में लगा दिया।
 
The brahmin descendants of Bhṛgu muni were very pleased with Bali Mahārāja who was trying to conquer the kingdom of Indra. Therefore, after ritually purifying him and giving him a bath, they engaged him in performing a sacrifice called Viśvājit.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)