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bhagavat 8.15.30: इसलिए, अपने शत्रुओं की स्थिति के उलट होने तक प्रतीक्षा करते हुए, तुम सबको इस स्वर्गलोक को छोड़ देना चाहिए और ऐसी जगह चले जाना चाहिए जहाँ तुम्हें कोई न देख सके।   |   bhagavat अध्याय 8.15: बलि महाराज द्वारा स्वर्गलोक पर विजय   ।   bhagavat स्कन्ध 8: ब्रह्माण्डीय सृष्टि का निवर्तन   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 8: ब्रह्माण्डीय सृष्टि का निवर्तन  »  अध्याय 15: बलि महाराज द्वारा स्वर्गलोक पर विजय  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  8.15.30 
तस्मान्निलयमुत्सृज्य यूयं सर्वे त्रिविष्टपम् ।
यात कालं प्रतीक्षन्तो यत: शत्रोर्विपर्यय: ॥ ३० ॥
 
 
अनुवाद
इसलिए, अपने शत्रुओं की स्थिति के उलट होने तक प्रतीक्षा करते हुए, तुम सबको इस स्वर्गलोक को छोड़ देना चाहिए और ऐसी जगह चले जाना चाहिए जहाँ तुम्हें कोई न देख सके।
 
Therefore, all of you should wait till the situation of your enemies changes and then leave this heaven and go to some place where you cannot be seen.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)