Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 8.15.3: शुकदेव गोस्वामी ने कहा: हे राजा! जब बलि महाराज ने अपनी सारी संपत्ति खो दी और युद्ध में मारे गए, तो भृगु मुनि के वंशज शुक्राचार्य ने उन्हें वापस जीवन में ले आए। इसके कारण, महान आत्मा बलि महाराज शुक्राचार्य के शिष्य बन गए और अपना सब कुछ समर्पित करके अत्यंत श्रद्धा के साथ उनकी सेवा करने लगे। | bhagavat अध्याय 8.15: बलि महाराज द्वारा स्वर्गलोक पर विजय । bhagavat स्कन्ध 8: ब्रह्माण्डीय सृष्टि का निवर्तन । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
श्रीशुक उवाच
पराजितश्रीरसुभिश्च हापितो
हीन्द्रेण राजन्भृगुभि: स जीवित: ।
सर्वात्मना तानभजद् भृगून्बलि:
शिष्यो महात्मार्थनिवेदनेन ॥ ३ ॥
अनुवाद
शुकदेव गोस्वामी ने कहा: हे राजा! जब बलि महाराज ने अपनी सारी संपत्ति खो दी और युद्ध में मारे गए, तो भृगु मुनि के वंशज शुक्राचार्य ने उन्हें वापस जीवन में ले आए। इसके कारण, महान आत्मा बलि महाराज शुक्राचार्य के शिष्य बन गए और अपना सब कुछ समर्पित करके अत्यंत श्रद्धा के साथ उनकी सेवा करने लगे।
Shukdev Goswami said: O King! When Bali lost all his wealth and was killed in the war, Shukracharya, a descendant of Bhrigu Muni, brought him back to life. Due to this, the great Bali became the disciple of Shukracharya and started serving him with great devotion by offering everything he had.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥