Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 8.15.10-11: जब वे अपने सैनिकों और असुरों के नेताओं जो शक्ति, ऐश्वर्य और सौंदर्य में उनके समान थे, के साथ एकत्रित हुए, तो वे ऐसे दिख रहे थे मानो आसमान को निगल लेंगे और अपनी नज़रों से सभी दिशाओं को जला देंगे। असुर सैनिकों को इस प्रकार इकट्ठा करने के बाद, बलि महाराज इंद्र की भव्य राजधानी के लिए निकल पड़े। निश्चित रूप से, ऐसा लग रहा था कि वे पूरी पृथ्वी को कंपाने वाले थे। | bhagavat अध्याय 8.15: बलि महाराज द्वारा स्वर्गलोक पर विजय । bhagavat स्कन्ध 8: ब्रह्माण्डीय सृष्टि का निवर्तन । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जब वे अपने सैनिकों और असुरों के नेताओं जो शक्ति, ऐश्वर्य और सौंदर्य में उनके समान थे, के साथ एकत्रित हुए, तो वे ऐसे दिख रहे थे मानो आसमान को निगल लेंगे और अपनी नज़रों से सभी दिशाओं को जला देंगे। असुर सैनिकों को इस प्रकार इकट्ठा करने के बाद, बलि महाराज इंद्र की भव्य राजधानी के लिए निकल पड़े। निश्चित रूप से, ऐसा लग रहा था कि वे पूरी पृथ्वी को कंपाने वाले थे।
When he assembled his troops and the demon leaders who were equal to him in strength, splendor and beauty, it seemed as if he would swallow up the sky and burn all directions with his sight. Having thus assembled the demon soldiers, Bali Maharaja set out for the opulent capital of Indra. Indeed, it seemed as if he would shake the entire universe.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥