श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 8: ब्रह्माण्डीय सृष्टि का निवर्तन  »  अध्याय 14: विश्व व्यवस्था की पद्धति  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  8.14.3 
यज्ञादयो या: कथिता: पौरुष्यस्तनवो नृप ।
मन्वादयो जगद्यात्रां नयन्त्याभि: प्रचोदिता: ॥ ३ ॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! मैंने आपको पहले ही प्रभु के विविध अवतारों का वर्णन किया है—जैसे यज्ञ अवतार का। यही अवतार मनुओं तथा अन्य लोगों को चुनते हैं और उन्हीं की आज्ञा पर वे विश्व-व्यवस्था का संचालन करते हैं।
 
O King, I have already described to you the various incarnations of the Lord, such as the incarnation of Yajna. It is these incarnations who select the Manus and others, and at their command they run the world-order.
तात्पर्य
मानुष ईश्वर के परम व्यक्तित्व के विभिन्न अवतारों में उनके आदेशों का पालन करते हैं।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)