श्रीराजोवाच
मन्वन्तरेषु भगवन्यथा मन्वादयस्त्विमे ।
यस्मिन्कर्मणि ये येन नियुक्तास्तद्वदस्व मे ॥ १ ॥
अनुवाद
महाराजा परीक्षित ने उत्सुकता से पूछा: हे परम ऐश्वर्यशाली शुकदेव गोस्वामी! कृपया मुझे बताएं कि प्रत्येक मन्वंतर में मनु और अन्य लोग अपने-अपने कर्तव्यों को कैसे निभाते हैं और वे किसके निर्देश पर ऐसा करते हैं।
Maharaja Pariksit inquired: O most glorious Sukadeva Goswami, kindly tell me how Manu and others perform their respective duties in each Manvantara and under whose orders they do so.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥