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bhagavat 8.14.1: महाराजा परीक्षित ने उत्सुकता से पूछा: हे परम ऐश्वर्यशाली शुकदेव गोस्वामी! कृपया मुझे बताएं कि प्रत्येक मन्वंतर में मनु और अन्य लोग अपने-अपने कर्तव्यों को कैसे निभाते हैं और वे किसके निर्देश पर ऐसा करते हैं।   |   bhagavat अध्याय 8.14: विश्व व्यवस्था की पद्धति   ।   bhagavat स्कन्ध 8: ब्रह्माण्डीय सृष्टि का निवर्तन   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 8: ब्रह्माण्डीय सृष्टि का निवर्तन  »  अध्याय 14: विश्व व्यवस्था की पद्धति  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  8.14.1 
श्रीराजोवाच
मन्वन्तरेषु भगवन्यथा मन्वादयस्त्विमे ।
यस्मिन्कर्मणि ये येन नियुक्तास्तद्वदस्व मे ॥ १ ॥
 
 
अनुवाद
महाराजा परीक्षित ने उत्सुकता से पूछा: हे परम ऐश्वर्यशाली शुकदेव गोस्वामी! कृपया मुझे बताएं कि प्रत्येक मन्वंतर में मनु और अन्य लोग अपने-अपने कर्तव्यों को कैसे निभाते हैं और वे किसके निर्देश पर ऐसा करते हैं।
 
Maharaja Pariksit inquired: O most glorious Sukadeva Goswami, kindly tell me how Manu and others perform their respective duties in each Manvantara and under whose orders they do so.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)